तुलसीदास पर था मुग़लकालीन भाषा का प्रभाव           
समाज-संस्कृति
मुग़लकाल में दिवाली भी ईद की तरह मनाई जाती           
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तवायफ से मलिका बनी ‘बेगम समरू’ कहानी           
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अपनी इबारत खुद लिखने वाली अदाकारा शौकत आज़मी           
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आज़ादी के बाद उर्दू को लेकर कैसे पैदा हुई गफ़लत?           
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